इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC, input Tax Credit) एक कर प्रणाली में एक तंत्र है जो व्यवसायों को कर योग्य आपूर्ति करने के लिए खरीदे गए सामान या सेवाओं पर भुगतान किए गए कर को कम करने की अनुमति देता है। यह व्यवसायों को उनकी कर देयता को कम करने और उनके नकदी प्रवाह को सुधारने में मदद कर सकता है।
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जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit in GST)
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक व्यापक कर प्रणाली है जो भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। जीएसटी के तहत, पंजीकृत करदाता अपने द्वारा खरीदे गए सामानों और सेवाओं पर भुगतान किए गए करों के लिए आईटीसी का दावा कर सकते हैं।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का अर्थ क्या है? (input tax credit meaning)
इनपुट टैक्स क्रेडिट एक कर है जो एक व्यवसाय अपनी खरीद पर भुगतान करता है और बाद में इसका उपयोग बिक्री के समय अपनी कर देयता को कम करने के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में, इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवसायों को उनके द्वारा खरीदे गए माल और सेवाओं पर भुगतान किए गए कर को पुनर्प्राप्त करने की अनुमति देता है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का उदाहरण( input tax credit example)
मान लीजिए कि एक निर्माता 100 रुपये में सामान खरीदता है और उस पर 12% जीएसटी चुकाता है, जो 12 रुपये है। निर्माता इस सामान का उपयोग अंतिम उत्पाद बनाने के लिए करता है, जिसकी बिक्री मूल्य 200 रुपये है। अंतिम उत्पाद पर 18% जीएसटी लागू होता है, जो 36 रुपये है। निर्माता अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट में 12 रुपये का दावा कर सकता है, जिसका अर्थ है कि उसे केवल 24 रुपये का जीएसटी देना होगा।
मान लीजिए राम लाल, ₹100 का माल खरीदता है, जिस पर 12% जीएसटी लगाया जाता है, यानी ₹12। राम लाल इस माल का उपयोग करके ₹150 का फर्नीचर बनाता है, जिस पर 18% जीएसटी लगाया जाता है, यानी ₹27।
आईटीसी के बिना, राम लाल को कुल जीएसटी ₹39 (₹12 + ₹27) का भुगतान करना होगा। हालांकि, आईटीसी के साथ, राम लाल केवल ₹15 का शुद्ध जीएसटी का भुगतान करेगा क्योंकि वह ₹12 के पहले से भुगतान किए गए जीएसटी का क्रेडिट ले सकता है।
इसलिए, आईटीसी ने राम लाल को ₹24 (₹39 – ₹15) की कर बचत प्रदान की है।
ITC का दावा करने के लिए दस्तावेज (Documents for input tax credit)
ITC का दावा करने के लिए, व्यवसायों को निम्नलिखित दस्तावेज रखने की आवश्यकता होती है:
- पंजीकृत विक्रेता द्वारा जारी GST चालान
- भुगतान का प्रमाण (बैंक स्टेटमेंट आदि)
- स्टॉक रजिस्टर या अन्य समान दस्तावेज यह दर्शाने के लिए कि खरीदे गए सामान या सेवाओं का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था
ITC के फायदे और नुकसान (Advantages and disadvantages of input tax credit)
इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ:
- कर बोझ में कमी: ITC करदाताओं को कर आधार से कम करने के लिए उन वस्तुओं और सेवाओं पर भुगतान किए गए कर का क्रेडिट लेने की अनुमति देता है जो उन्होंने कर योग्य वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन या आपूर्ति के लिए खरीदे हैं। इससे करदाताओं के कर बोझ में कमी आती है और उनकी नकदी प्रवाह में सुधार होता है।
- कर चोरी को कम करना: ITC करदाताओं को कर चोरी से बचने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि वे कर का भुगतान करने के बाद ही ITC का दावा कर सकते हैं।
- आर्थिक विकास को बढ़ावा देना: ITC करदाताओं को निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक धन उपलब्ध कराता है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट के नुकसान:
- प्रशासनिक बोझ: ITC प्रणाली को प्रशासित करना जटिल हो सकता है, जिससे करदाताओं और कर अधिकारियों दोनों के लिए बोझ बढ़ सकता है।
- कर चोरी के लिए अवसर: ITC प्रणाली में गलत तरीकों से ITC का दावा करने के लिए अवसर हो सकते हैं, जिससे कर चोरी हो सकती है।
- छोटे व्यवसायों के लिए बोझ: ITC प्रणाली छोटे व्यवसायों के लिए बोझिल हो सकती है, जिससे उन्हें कर चोरी करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
आईटीसी पात्र और अपात्र (eligible and ineligible input tax credit)
ITC के दायरे में क्या आता है?(eligibility and conditions for taking input tax credit section 16)
इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए पात्र होने के लिए, एक पंजीकृत व्यक्ति को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए:
- वह एक पंजीकृत व्यक्ति होना चाहिए: इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा दावा किया जा सकता है। गैर-पंजीकृत व्यक्ति इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते हैं।
- उसने पंजीकृत आपूर्तिकर्ता से माल या सेवाओं की आपूर्ति प्राप्त की होनी चाहिए: इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त माल या सेवाओं की आपूर्ति के लिए दावा किया जा सकता है। गैर-पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त माल या सेवाओं की आपूर्ति के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता है।
- उसने माल या सेवाओं का उपयोग अपने व्यवसाय में किया हो: इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल उन माल या सेवाओं के लिए दावा किया जा सकता है जो व्यवसाय में उपयोग किए जाते हैं। निजी उपयोग के लिए खरीदे गए माल या सेवाओं के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता है।
- उसने वैध टैक्स चालान प्राप्त किया हो: इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए, पंजीकृत व्यक्ति के पास वैध टैक्स चालान होना चाहिए। वैध टैक्स चालान में निम्नलिखित जानकारी होनी चाहिए:
- आपूर्तिकर्ता का जीएसटीआईएन नंबर
- चालान की तारीख
- माल या सेवाओं का विवरण
- माल या सेवाओं का मूल्य
- CGST, SGST और IGST की राशि
- उसने अपने जीएसटी रिटर्न में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया हो: इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए, पंजीकृत व्यक्ति को अपने जीएसटी रिटर्न में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करना चाहिए।
ITC के दायरे में क्या नहीं आता?(Ineligible input tax credit)
ITC के दायरे में निम्नलिखित शामिल नहीं हैं:
- व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदे गए सामान या सेवाओं पर भुगतान किया गया कर
- छूट प्राप्त सामानों या सेवाओं पर भुगतान किया गया कर
- सरकारी शुल्क (जैसे स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क)
- जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा
- अचल संपत्तियों के निर्माण पर भुगतान किया गया GST, प्लांट और मशीनरी को छोड़कर
- विदेशी पर्यटकों को प्रदान की जाने वाली सेवाएं
- माल या सेवाओं की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान पर भुगतान किया गया जीएसटी
इनपुट टैक्स क्रेडिट का रिवर्सल (reversal of input tax credit)
इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) करदाताओं को व्यवसाय में उपयोग किए गए माल और सेवाओं पर भुगतान किए गए जीएसटी का क्रेडिट लेने की अनुमति देती है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में, आईटीसी को रिवर्स करने की आवश्यकता होती है।
आईटीसी रिवर्सल क्यों आवश्यक है?
आईटीसी रिवर्सल निम्नलिखित कारणों से आवश्यक हो सकता है:
- माल या सेवाओं का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है: यदि माल या सेवाओं का उपयोग व्यक्तिगत उपयोग या छूट प्राप्त सामानों के लिए किया जाता है, तो आईटीसी का दावा नहीं किया जा सकता है। इस मामले में, आईटीसी को रिवर्स करना होगा।
- माल या सेवाओं को वापस कर दिया जाता है: यदि माल या सेवाओं को आपूर्तिकर्ता को वापस कर दिया जाता है, तो आईटीसी को रिवर्स करना होगा।
- माल या सेवाओं को पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जाता है: यदि माल या सेवाओं का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जाता है, तो आईटीसी को आंशिक रूप से रिवर्स करना होगा।
आईटीसी रिवर्सल कैसे किया जाता है?
आईटीसी रिवर्सल जीएसटी रिटर्न फाइल करके किया जाता है। फॉर्म GSTR-3B में आईटीसी रिवर्सल का विवरण दिया गया है। आईटीसी रिवर्सल करने के लिए, करदाता को निम्नलिखित जानकारी प्रदान करनी होगी:
- आईटीसी रिवर्सल करने का कारण: करदाता को आईटीसी रिवर्सल करने का कारण स्पष्ट रूप से बताना होगा।
- आईटीसी रिवर्सल की राशि: करदाता को आईटीसी रिवर्सल की राशि का उल्लेख करना होगा।
- आईटीसी रिवर्सल से संबंधित चालान या अन्य दस्तावेजों की संख्या और तारीख: करदाता को आईटीसी रिवर्सल से संबंधित चालान या अन्य दस्तावेजों की संख्या और तारीख का उल्लेख करना होगा।
आईटीसी रिवर्सल के परिणाम क्या हैं?
आईटीसी रिवर्सल के निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:
- कर देयता बढ़ सकती है: यदि आईटीसी रिवर्स किया जाता है, तो करदाता की कर देयता बढ़ सकती है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि कम हो सकती है: यदि आईटीसी रिवर्स किया जाता है, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि कम हो सकती है।
- करदाता को ब्याज या जुर्माना देना पड़ सकता है: यदि आईटीसी गलत तरीके से दावा किया गया था और बाद में रिवर्स किया जाता है, तो करदाता को ब्याज या जुर्माना देना पड़ सकता है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कैसे करें? (Claim input tax credit under GST)
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए, पंजीकृत व्यापारियों को GSTR-3B फॉर्म में इनपुट टैक्स क्रेडिट का विवरण जमा करना होगा। GSTR-3B फॉर्म मासिक या तिमाही आधार पर दाखिल किया जा सकता है ।
आईटीसी का दावा करने के लिए, एक करदाता को अपने जीएसटी रिटर्न में निम्नलिखित जानकारी प्रदान करनी होगी:
- क्रेडिट का दावा करने वाले आपूर्तिकर्ता का जीएसटी पंजीकरण नंबर (GSTIN)
- आपूर्ति का चालान नंबर
- चालान की तारीख
- जीएसटी की राशि जिसके लिए क्रेडिट का दावा किया जा रहा है
ITC का दावा करने की समय सीमा (Time limit for input tax credit)
ITC का दावा उस कर अवधि में किया जाना चाहिए जिसमें सामान या सेवाएं खरीदी गई थीं। यदि ITC का दावा सही समय पर नहीं किया जाता है, तो उसे खारिज कर दिया जा सकता है।
ITC के दुरुपयोग पर रोक (Suggestion for prevention of misuse of input tax credit)
ITC के दुरुपयोग को रोकने के लिए, सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ITC दावा करने के लिए पात्रता के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता
- ITC दावों की जांच और पुष्टि के लिए GST अधिकारियों को शक्तियां
- ITC दावों के दुरुपयोग के लिए दंड का प्रावधान
Determination of Value of taxable supply under GST : कर योग्य आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण
Time of Supply of Services under GST : जीएसटी के तहत सेवाओं की आपूर्ति का समय
Time of supply of goods under GST Section 12 : माल की आपूर्ति का समय
GST OFFICERS : GST के तहत अधिकारियों की नियुक्ति, शक्तियां
इनपुट टैक्स क्रेडिट संबंधी समस्याएं और समाधान(input tax credit problems and solutions)
प्रश्न 1. इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है?
उत्तर: इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक कर प्रणाली में एक प्रावधान है जो किसी व्यवसाय को अपने आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे गए माल या सेवाओं पर भुगतान किए गए कर की राशि को कम करने की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य कर के बोझ को कम करना और व्यवसायों को कर प्रोत्साहन प्रदान करना है।
प्रश्न 2. ITC का दावा कौन कर सकता है?
उत्तर: ITC का दावा केवल पंजीकृत करदाता कर सकते हैं। अपंजीकृत करदाता ITC का दावा नहीं कर सकते हैं।
प्रश्न 3. ITC का दावा कैसे किया जाता है?
उत्तर: ITC का दावा जीएसटी रिटर्न दाखिल करके किया जाता है। ITC का दावा करने के लिए, करदाता को अपने आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त कर चालानों को संलग्न करना होगा।
प्रश्न 4. क्या ITC का दावा किया जा सकता है यदि माल या सेवाओं का उपयोग गैर-कर योग्य व्यक्तियों को बेच दिया जाता है?
उत्तर: नहीं, ITC का दावा नहीं किया जा सकता है यदि माल या सेवाओं का उपयोग गैर-कर योग्य व्यक्तियों को बेच दिया जाता है।
प्रश्न 5. ITC का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: ITC का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:
कर के भुगतान के लिए
इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में अगले कर अवधि में कैरी फॉरवर्ड करने के लिए
निष्कर्ष:
ITC एक महत्वपूर्ण कर प्रणाली तंत्र है जो करदाताओं को करों के बोझ को कम करने में मदद करती है। जीएसटी के तहत, पंजीकृत करदाता अपने द्वारा खरीदे गए सामानों और सेवाओं पर भुगतान किए गए करों के लिए आईटीसी का दावा कर सकते हैं। आईटीसी का दावा करने के लिए, करदाताओं को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। आईटीसी करों के दोहरे कराधान को रोकता है, व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है और निर्यात को बढ़ावा देता है। आईटीसी प्रणाली का दुरुपयोग किया जा सकता है, इसलिए सरकार आईटीसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए विभिन्न उपाय करती है।